राजनैतिक और सामाजिक इच्छा शक्ति की कमी का शिकार है बाल श्रमिक।





आजादी से पहले एक ऐसे भारत का सपना संजोया गया था जिसमें हर तरफ खुशहाली की उम्मीद जाग रही थी लेकिन स्वतन्त्रता प्राप्ति के 75 वर्ष बाद भी एक बड़ा वर्ग आर्थिक, सामाजिक शैक्षिक रूप से पिछड़ेपन व शोषण का जीवन बाल श्रमिक के रूप में व्यतीत कर रहा है, बालश्रम अपराध है अभिशाप है का नारा वर्षो से लगाया जा रहा है, 1986 में बने बालश्रम (प्रतिषेध और विनिमयन) संशोधन अधिनियम में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से बालश्रम करवाया जाना अपराध घोषित है, परन्तु राजनैतिक एवं सामाजिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण बालश्रम उन्मूलन के लिए किए जा रहे है प्रयासों से अपेक्षाकृत परिणाम नजर नहीं आ रहे है, किसी भी बड़े राजनैतिक दल द्वारा बालश्रम उन्मूलन को अपने मेंनीफेस्टो व कार्यक्रमो में प्राथमिकता नहीं दी जाती है। क्योंकि वो उनका वोट बैंक नहीं है। बालश्रम पर अन्तर्राष्ट्रीय घ्यानाकर्षण हेतु आई. एल. ओ. द्वारा 12 जून को बालश्रम निषेध दिवस के रूप में मनाने की घोषणा वर्ष 2002 में की थी।

 

 

संयुक्त राष्ट्र की रिर्पोट के अनुसार विश्व में 152 मिलियन से ज्यादा बच्चे बालश्रम से जुड़े है वर्ष 2011 के जनसंख्या गणना अनुसार अकेले भारत में 10.1 मिलियन बच्चे विभिन्न व्यवसाय में बालश्रम से जुड़े पाए गए है, यूनिसेफ के अनुसार विश्व में बाल श्रम में 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी भारत की है, गैर सरकारी आंकड़ांे के अनुसार भारत मेें लगभग 5 करोड़ बच्चे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से बालश्रम से जुड़े है। अनुच्छेद 24 व 39 ई में बालश्रम के बारे में स्वच्छ उल्लेख है व 21 अ में 6-14  वर्ष के बच्चों को मुफ्त अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है।


क्या हमें अहसास है कि हम होटलों पर चाय पिलाने वाला छोटू सुबह से रात तक कितने घण्टे होटल मंे काम करता है ? आपके हाथों मे बजने वाली खनकदार चूड़ियांे को किसने गोल किया है ? आपके जान माल की सुरक्षा करने वाले आपके दरवाजे पर टंगें ताले मंे किसका बचपन कैद हुआ है ? आपके सिगरेट, बीड़ी, सुलगाने की माचिस और आपको मनोरंजन और उल्लास के लिए छोड़े जाने वाले पटाखों में किसका बचपन जला है ? आपके जूतों के लिए चमड़े को रंगकर चमकाने में किसके हाथों और चेहरे पर कालिख पुत जाती है ? जी हां ! ये वही बच्चे है जो आपके लिए सब कुछ करने के बाद और अपने बचपन और सपनांे की बलि चढ़ाने के बाद भी दो वक्त की रोटी, कपड़ा और मकान से महरूम है। बालश्रम प्रतिषेध और विनियमन संशोधन विधेयक 2016 में सभी व्यवसायों या उद्योगों में 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाना प्रतिबन्धित किया गया है। इसे शिक्षा का अधिकार कानून 2009 से भी जोड़ा गया है।

 

 

 

संषोधन के मुख्य तथ्यः  इस विधेयक के अनुसार चौदह वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम करवाना संज्ञेय अपराध माना जाएगा, इसके लिए नियोक्ता के साथ-साथ माता-पिता को भी दण्डित किया जाएगा।किसी बच्चे से बालश्रम करवाने पर कारावास की अवधि छः महीने से दो साल तक  है। जुर्माना बढ़ाकर बीस हजार रुपये से पचास हजार रुपये तक कर दिया गया है। दूसरी बार अपराध करने पर एक साल से तीन साल तक का कारावास का प्रावधान है।


सामाजिक व्यवस्था भी दोषमुक्त नहीं कही जा सकती है जब तक समाज बच्चे देश का भविष्य बाल श्रम अपराध है अभिषाप है के नारे को साकार करने में अपनी सहभागिता नहीं देते है तब तक यह समस्या बनी रहेगी। इस समस्या के समाधान संभव है यदि - कानून की क्रियान्विती प्रभावी तरीके से हो एवं न्याय व दण्ड प्र्रक्रिया शीघ्र निपटाई जाए, वयस्कों को रोजगार दिया जाए। बी.पी.एल. सूची में शामिल करते हुए सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिले, बाल मजदूरी के लिए रखे जाने वाले उद्योगों पर निगरानी रखी जाए।अनिवार्य शिक्षा को प्रभावी क्रियान्विती हो, बच्चों का स्कूल में नामांकन होने के बाद भी वह यदि मजदूरी पर जाता है तो माता-पिता को भी दण्डित किया जाए, उन वस्तुओं और उत्पादों का बहिष्कार किया जाए जो बाल श्रमिकों से बनवाई जाती है, अभिभावकों हेतु जागरूकता कार्यक्रम करवाना, बाल श्रमिक परियोजना जो विस्तार सभी बालश्रमिक जिलों में आवश्यक संशोधनों के साथ जारी रखा जाए, बाल एवं किशोर श्रमिक पुर्नवास फण्ड के गठन में सभी जगह सक्रियता दिखाई जाए।

 

 

 


जहां भारत विश्व में एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है वहां बाल श्रम एक अभिशाप है इस पर चिन्तन के साथ-साथ अमल की भी जरूरत है।नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार जी.ई.आर. ग्रास एनरोलमेंट रेश्यों 100 प्रतिशत वर्ष 2030 तक का लक्ष्य रखा गया है। यदि गंभीरता से लेना है तो इन पर प्रभावी क्रियान्विती की आवश्यकता है।

                    

डॉ. जमील काज़मी

(राजस्थान में बालश्रमिकों पर विष्लेषणात्मक अघ्ययन पर पी.एच.डी.)
अध्यक्ष, मौलाना आजाद विश्वविद्यालय, जोधपुर

 मोबाइल नम्बर-9414002044 

      

     

       


2023-06-15 00:31:28