अरे! ये चुनावी साल है।



 
 
चुनावों की आहट से राजनीति में सक्रिय लोगों को साधने में लगी हुई है। सभी पार्टियां, लेकिन प्रमुख राष्ट्रीय दलों के संगठन में गुटबाजी जग जाहिर है। दोनों दलों के राज्य स्तर पे कार्यकर्ता उलझन में हैं साथ ही टिकट के दावेदार भी प्रमुख दल के किस गुट से नजदीकियां बढ़ाने की ऊहापोह में हैं कि कोन से गुट से टिकट मिल सकती है वो जमीन ढूंढने में लगे हैं। राजनैतिक विशेषज्ञ अबकी बार संभावना जता रहे हैं कि अबकी बार का चुनाव पंचकोणीय होगा। बागी उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। अबकी बार ये संभावना भी है कि जातीय समीकरण भी देखने में आ रहे हैं, कुछ लोगों की सता व संगठन मे उपेक्षा हुई है वे आंतरिक रूप से अपनी साख, दांव पर लगा सकते हैं। पिछले दिनों सभी समाज की महापंचायते हुई सब समाजों में राजनैतिक हलचल  जारी है। अंदर खाते प्रमुख बड़ी जातियों के लोग सक्रिय हैं ऐसा लगता है कि राजनैतिक दलों को टिकट बटवारा करने मे भी पसीने आएंगे।
     कल कांग्रेस के सह प्रभारी निजामुद्दीन काजी से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने एक टिकट की मांग रखी तो काजी साहब ने कहा तुम जीत नही सकते तब प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि क्या सभी जीतते हैं ? ये जरूरी तो नहीं तो फिर हम वोट देने वाले ही रहेंगे। साढ़े चार साल में हमे एक राज्य मंत्री स्तर का पद नहीं मिला। न ही कोई कल्याण बोर्ड बनाया गया जबकि मुस्लिमों के कई स्थान ऐसे हैं जिन पे अकारण विरोध होते हैं जिन पर प्रशासन भी कोई सशक्त निर्णय नहीं लेती। पिछले दिनों हज कमेटी के अध्यक्ष, वकफ बोर्ड अध्यक्ष व आज मुमताज मसीह भी डैमेज कंट्रोल करने आए हैं। रूठे चेहरे मनाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है, साथ ही मुस्लिम महापंचायत की दो महीने से चल रही मुहीम का एकदम ठहराव आना भी कुछ सवाल खड़े होने के संकेत करते हैं। हो सकता है कि मुस्लिम पंचायत करने वाले अग्रिम पंक्ति के लोग व्यवस्था की तैयारी में जुटे हुए हों।
        अबकी बार मुस्लिम शिक्षा अधिकारी रहे एक अधिकारी भी अपनी किस्मत आजमाने कांग्रेस के अलावा अन्य दलों के समपर्क में हैं। अन्य जनप्रतिनिधि कांग्रेस से टिकट लेने की दौड़ में हैं। कुछ व्यवसायी व रिटायर्ड कर्मचारी भी विभिन्न जातियों के साथ समझौते के प्रयास में हैं कि आप हमे वोट दो हम तुम्हें देंगे सात सीटों में टिकट की भी अबकी बार संभावनाए तलाशी जा रही है। एस सी - ओबीसी भी इस बार कुछ नया करने के मूड में हैं जनरल सीटों पर किसी के फेवर में लामबनद हो सकती हैं। अबकी खेला हुईबे।  
           विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि बीजेपी भी मुस्लिम अल्पसंख्यक वर्ग को टिकट देने के मूड में है । पिछले अर्से से बीकानेर में कई पार्टियां विभिन्न बड़ी जातियों( संख्या) के  चिर परिचित ऐसे लोकप्रिय चेहरे (उम्मीदवार)  पे हाथ रखने वाली है जिनके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता कुछ लोग तो अभी से तैयारी में हैं अपने पत्ते अक्टूबर में खोलेंगे। चंद लोग जो दोनो पार्टियों में नेताओं के इर्द गिर्द नजर आते हैं उनका रिएक्शन भी अंदर खाते हो रहा है कि ये वोटों के झर्रे हैं क्या? इसलिए दोनों बड़े दलों के नेता अपने खुपियातंत्र के जाल को फैला रहा है। फैलाना भी चाहिए अभी कुछ भी हो सकता है इसकी संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। चुनावी साल है वोटर व राजनीति के पहलवान एक दूसरे की दुखती रग का ईलाज करने में लगे हैं, ये राजनीति है जिसमें सब कुछ संभव है।
 
मोइनुद्दीन कोहरी *नाचीज़*
मोबाइल +919680868028
 
नोट- उपरोक्त लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं। सभी सहमत हों, ये ज़रूरी नहीं है। ग्लोबल न्यूज़ इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं होगा।
 
 

2023-06-04 13:26:32